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धमदाहा नगर पंचायत में वित्तीय अनियमितता का आरोप, निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो हाई कोर्ट जाने की चेतावनी

पूर्णिया /प्रतिनिधि /विशेष संवाददाता, पूर्णिया(मालंच नई सुबह)पूर्णिया। पूर्णिया जिले के धमदाहा नगर पंचायत में सरकारी योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं इंजीनियर कुंदन रंजन (उर्फ चुन्ना ठाकुर) ने नगर पंचायत प्रशासन पर विकास योजनाओं में व्यापक गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है तो वे पटना हाई कोर्ट का रुख करेंगे।


कुंदन रंजन का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न विकास कार्यों में खरीद-बिक्री के दौरान वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। उनका दावा है कि नगर पंचायत में लगाए गए साइनिंग बोर्ड, वेलकम बोर्ड और अन्य सामग्रियों की खरीद बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर की गई।

उन्होंने वार्ड संख्या 12 में करीब 14 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निर्माण के एक माह के भीतर ही सड़क में दरारें आ गई हैं, जो कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पंचायत में कई नियुक्तियां नियमों की अनदेखी कर की गईं, जो सर्वोच्च न्यायालय के उमा देवी फैसले की भावना के विपरीत हैं।

कुंदन रंजन के अनुसार, उन्होंने इस मामले की शिकायत अनुमंडल पदाधिकारी से लेकर राष्ट्रपति तक विभिन्न स्तरों पर की है। उनका कहना है कि नगर विकास एवं आवास विभाग ने फरवरी और जून 2026 में जिला पदाधिकारी को जांच के निर्देश भी दिए, लेकिन अब तक न तो जांच पूरी हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय जांच टीम ने शिकायतों की जानकारी तो ली, लेकिन इसके बाद जांच आगे नहीं बढ़ सकी। मामले में देरी को देखते हुए उन्होंने दोबारा प्रमंडलीय आयुक्त से मुलाकात कर साक्ष्य प्रस्तुत किए। उनके अनुसार, आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ निष्पक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कुंदन रंजन ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में पूर्व स्टैंडिंग कमेटी, तत्कालीन जनप्रतिनिधियों और नगर पंचायत के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत रही है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी शिकायतें गलत साबित होती हैं तो प्रशासन उनके विरुद्ध कार्रवाई करे, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश के बाद जिला प्रशासन जांच को किस गति से आगे बढ़ाता है और तथ्यों के आधार पर क्या कार्रवाई करता है।

 

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