बढ़ती महंगाई की मार….
बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार……. जैसे लुभावने नारे से , कुछ जनता भ्रम में पड़कर भारी मतों से नेता जी को जिताया। आज वही जनता महंगाई से त्रस्त हैं। पिछले कुछ वर्षों से खाने पीने का सामान का…
डिजिटल लाभ का दोहन – समय की मांग
डिजिटल लाभ का दोहन – समय की मांग सलिल सरोज कार्यकारी अधिकारीलोक सभा सचिवालय संसद भवन सूचना प्रौद्योगिकी और संचार प्रौद्योगिकियों में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए अवसर और चुनौतियां प्रदान करने की अपार संभावनाएं हैं। 1990 के दशक में…
कायस्थ समाज राजनीतिक अस्पृश्यता का शिकार- राजनीतिक रूप से अल्पसंख्यक की श्रेणी में
कायस्थ समाज राजनीतिक अस्पृश्यता का शिकार- राजनीतिक रूप से अल्पसंख्यक की श्रेणी में ———-राजीव रंजन प्रसाद , जीकेसी सचिव जदयू कायस्थ समाज राजनीतिक अस्पृश्यता का शिकार हो गया है और राजनीतिक रूप…
संपूर्ण क्रांति के प्रणेता
देवांशु शेखर मिश्र ‘क्रांतियां क्रांतिकारियों की बिल्कुल मर्जी पर ही नहीं हुआ करती। क्रांति की सफलता के लिए सामाजिक एवं ऐतिहासिक परिस्थितियां परिपक्व होनी चाहिए।’ ये शब्द देश के सर्वाधिक संघर्षशील राजनीतिज्ञ जयप्रकाश नारायण जी का है,जो आज भी प्रासंगिक…
स्त्री सशक्तिकरण और सनातन धर्म
ऋचा वर्मा हम सब महाशक्ति मां दुर्गा की पूजा का उत्सव मना रहे हैं और उसी बहाने समझ रहे हैं नारी के अनेक रूपों को। अधिकतर जब भी हम नारियों के उत्थान की बात, उनकी अस्मिता की बात करते हैं…
दस महाविद्याओं में एक है बगलामुखी महाविद्या
जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, बीसवीं सदी के आखिरी दशक से आज 2021 तक लगभग उन सभी क्षेत्रों में जहां जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति सफल रही थी आज जयप्रकाश नारायण के अनुयायियों की सत्ता है। यह बीसवीं सदी के आखिरी…
सत्ताधीश जे पी के अनुयाई और जेपी विचारधारा के विपरीत सत्ता की धारा…
———नीरव समदर्शी बीसवीं सदी के आखिरी दशक से आज 2021 तक लगभग उन सभी क्षेत्रों में जहां जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति सफल रही थी आज जयप्रकाश नारायण के अनुयायियों की सत्ता है। यह बीसवीं सदी के आखिरी दशक के…
लट्ठतन्त्र की वापसी
अनिल सिंह जैसा कि ‘राग दरबारी’ पढ़ने वाले जानते हैं, लोकतन्त्र के जन्मकाल से लेकर आजतक चुनाव जीतने की तीन तरकीबें ही ईजाद हो सकी हैं। ‘राग दरबारी’ में इनका वर्णन ‘रामनगर वाली’, नेवादा वाली’ और ‘महिपालपुर वाली’ तरकीबों के…
नारी शिक्षा और नारी सशक्तिकरण
मीरा श्रीवास्तव राजेन्द्र नगर , आरा कहा जाता है कि ,’ नास्ति विद्यासमां चक्क्षुर्नास्ति समोगुरु ‘ अर्थात् विद्या से बढ़कर नेत्र नहीं एवं माता के समान गुरु नहीं | वेदों ने भी इस उक्ति को समर्थित करते हुए स्पष्ट कहा…
बलात्कार क्यों होता हैं
प्रेमलता सिंह, पटना ,बिहार बलात्कार क्यों होता हैं, हम सभी को इसके जड़ तक जाने की जरुरत हैं।आखिर ये मानसिक विकार पुरुषों में आता क्यों हैं? ये सच है कि हरेक जीव -जंतु में काम तत्त्व (वासना) सामान्य रूप से…
नारी तेरी यही कहानी
निक्की शर्मा ‘रश्मि ‘मुम्बई भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत ही सम्मान और महत्व दिया गया है, धरती पर नारी के अनेक रूप हैं। नारी को दुर्गा , काली, चंडी एवं सरस्वती के रूप मानने वाले लोगों की मानसिकता कहां…









