महाभारत के समय से शुरू हुई जीवित्पुत्रिका व्रत
जितेन्द्र कुमार सिन्ह , पटना महाभारत के युद्ध में अश्वत्थामा अपने पिता की मृत्यु के बाद पाण्डवों से बेहद नाराज थे। अश्वत्थामा अपने मन में बदले की भावना लिए पाण्डवों के शिविर में चले गए, उस शिविर में 5 लोग…
कोरोना की तरह फैलता जा रहा है प्यार से शुरू होकर देह व्यपार तक का सफर
नीरव समदर्शी जैसे जैसे हमारा समाज बाजारवादी संस्कृति में डूबता जा रहा हैवैसे वैसे ब्यूटी पार्लर साइबर कैफे और रेस्टोरेंट में हो रही छापेमारी के क्रम में काफी बड़ी संख्या में अच्छे घरों की लड़के लड़कियां आपत्तिजनक स्थिति में…
राजनीतिग्यो की सत्ता लोलुपता और टुकड़ों में विघटित भारतीय समाज
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 1989 के बाद से 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पूर्व तक एक भी स्पष्ट बहुमत की सरकार नहीं बन पाई। यहां यह बताना बहुत जरूरी है कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव…
ये कौन होते हैं?
प्रेमलता सिंह,पटना “औरत की त्रियाचरित्र दैय्यो ना जानें।” ये कहावत कहते घर हो या बाहर पुरूष दिख ही जाते है। चौक- चौराहे, पार्क हो जहाँ पांच दस पुरुष मंडली बैठे नही की बातचीत शुरू कर देते हैं। औरतों के खाने…
स्त्री विमर्श के बहाने
ऋचा वर्मा स्त्री विमर्श, महिला सशक्तिकरण और वीमेंस लिब यह सब कुछ ऐसे शब्द हैं जिनकी चर्चा आजकल जोरों पर है या दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि आधुनिक समय में सबसे ज्यादा ट्रेंड करने वाले शब्द हैं,…
हिंदी भाषा बनाम बिहारी भाषा
ऋचा वर्मा जब भाषा की बात आती है तो, रेडियर नामक एक जर्मन का कथन कि संस्कृत सौ से भी अधिक भाषाओं की जननी है, हम सब हिंदी भाषियों के रोम-रोम को पुलकित कर देती है, क्योंकि यह सर्वविदित है…
राष्ट्रभाषा के विस्तार में बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का है विशेष योगदान – महात्मा गांधी, राजेन्द्र प्रसाद और पीर मुहम्मद मुनिस के सहयोग से हुई थी इसकी स्थापना
जिन दिनों देश में स्वतंत्रता आंदोलन जोर पकड़ रहा था और सरकारी स्कूल-कॉलेज के बहिष्कार की एक लहर पूरे देश में फैल रही थी, हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने, न सिर्फ हिन्दी की सेवा के लिए लोगों को जागरूक किया, बल्कि…
वे हिंदू बनकर रह जाते हैं, मनुष्य के रूप में नहीं सोच-समझ पाते
प्रणव प्रियदर्शी सह सम्पादक नवभारत टाइम्स बचपन में या कच्ची उमर में किसी बड़े विचार, बड़े संगठन या बड़ी लड़ाई का हिस्सा बनने का एक फायदा या नुकसान यह होता है कि आपकी मानसिक, वैचारिक संरचना में ऐसे ठोस बदलाव…
हेमाद्रि संकल्प और ऋषि पंचमी
डॉ नीता चौबीसा, लेखिका एव भारतविद, बाँसवाड़ा राजस्थान भारत की ऋषि संस्कृति में संस्कारों का बहुत महत्व है।वस्तुतः संस्कृति एवं संस्कार अन्योन्याश्रित होते है।संस्कारो से है संस्कृति का निर्माण होता है।सम् की आवृति करके सम्यक संस्कार से ही संस्कृति का…
गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन निषेध क्यो?”
डॉ नीता चौबीसा, लेखिका एव भारतविद,बाँसवाड़ा राजस्थान भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। देशभर में धूमधाम से इस दिन गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह शुभ तिथि …
हरतालिका तीज आया
प्रियंका त्रिबेदी ( बक्सर) हरतालिका तीज आय हस्त नक्षत्र की तिथि तृतीया।। माँ गौरा ने किया व्रत तुम्हारा। उनकी चिंता को तूने हर डाला।। बन दुल्हा तू दक्ष के द्वार आया। गौरा के संग तब ब्याह रचाया।। खुद पिए शिव,विष का…
जिजीविषा और तप के बीज:हरितालिका तीज!”
डॉक्टर नीता चौबीसा लेखिका ,बांसवाड़ा राजस्थान भारतविद उत्सवधर्मी एवं अनूठी भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं के लिए लोकप्रसिद्ध रंग निराले है जो जीवन दर्शन भी देते है और जीने को उमंग के साथ सलीके से जीना भी सिखाते है।भारतीय संस्कृति के सावन…










