न्यायिक चेतना से ही पुलिस अपराधी करण की रोकथाम
प्रणव प्रियदर्शी सह सम्पादक नव भारत टाइम्स पुलिस बल की यह आपराधी मानसिकता किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक समाज की एक बड़ी समस्या होती है। इसलिए पुलिस बल के ऊपर दो तरह का अंकुश रखा जाता है। पहला है न्याय तंत्र…
भारत के 5000 सालों के इतिहास में कायस्थ समाज का अतुलनीय योगदान
राजीव रंजन प्रसाद अध्यक्ष जीकेसी कायस्थ समाज राजनीतिक अस्पृश्यता का शिकार है। हम राजनीतिक रूप से अल्पसंख्यक की श्रेणी में आ गए हैं। राजनीति में कमजोर होने के कारण यह समाज प्रशासन सहित अन्य क्षेत्रों में पिछड़ता चला जा रहा…
सुशासन राज का कुशासन सुरसा के मुंह की तरह फैलता जा रहा है….
नीरव समदर्शी इस बार की नीतीश सरकार छोटी मंत्रिमंडल के गठन से बनी थी।उम्मीद की जा रही थी कि 10-15 दिनों में विस्तार की जाएगी लेकिन सम्पूर्ण सत्ता तंत्र इतनी कमजोर ,लचार अकर्मण्य रही कि अपना मंत्रिमंडल विस्तार की आपसी…
बढ़ती वनाग्नि: एक वैश्विक चिंता”
डॉ.नीता चौबीसा, बांसवाड़ा राजस्थान पूरी पृथ्वी पर वनों में भड़कता दावानल इस वक्त चिंता और चिंतन का मुद्दा बना हुआ है।हाल ही में जंगल की आग से निकले काले धुएं से पूरे तुर्की का आसमान धुएं से ढक गया है ।लगभग वहां…
एक श्रेष्ठ शिक्षक,श्रेष्ठ शिष्य:अब्दुल कलाम”
डॉ.नीता चौबीसा, बांसवाड़ा राजस्थान आज फिर से पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा है। सही मायने में एक शिक्षक ही वो व्यक्ति होता है जो आपको हमेशा एक बड़े मुकाम पर देखना चाहता है। आज का दिन सिर्फ उन शिक्षकों के…
रेड लाइट एरिया ..आखिर कब तक?”
डॉ.नीता चौबीसा, बांसवाड़ा राजस्थान देह व्यापार पूरी दुनिया में आज भी महिलाओं की दैहिक स्वतंत्रता पर एक बड़ा कलंक है। भारत जैसे सुसभ्य देश में जहां स्त्री़ को पूज्य माना गया है, वहां भी लंबे समय से महिलाएं देह व्यापार…
न्यू इंडिया का मिशन-शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता
सलिला सरोज परिचय प्रधानमंत्री ने 2022 तक एक नए भारत की स्थापना के लिए अपना स्पष्ट आह्वान किया है। ‘नए भारत के लिए रणनीति @ 75’ में प्रधान मंत्री के तीन प्रमुख संदेश हैं। सबसे पहले, विकास एक जन आंदोलन…
वसुधैव कुटुम्बकम
सलिला सरोज संपूर्ण दक्षिण-पूर्व एशिया को इसकी अधिकांश संस्कृति भारत से प्राप्त हुई है, ऐसा सिर्फ अनुमान ही नहीं बल्कि प्रामाणिक साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। 5 वीं शताब्दी ई.पू. की शुरुआत में पश्चिमी भारत के उपनिवेशवासी सीलोन में बस गए,…
संघर्ष की धधकती मशाल: श्री कृष्ण”
डॉ.नीता चौबीसा, बांसवाड़ा राजस्थान अध्यात्म के विराट आकाश में श्रीकृष्ण ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों व ऊंचाइयों पर जाकर भी न तो गंभीर ही दिखाई देते हैं और न ही उदासीन दीख पड़ते हैं, अपितु…
“पर्यावरण क्रांति के अग्रदूत :श्री कृष्ण”
कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष) पर्यावरण संरक्षण की चेतना वैदिक काल से ही प्रचलित है। प्रकृति और मनुष्य सदैव से ही एक दूसरे के पूरक रहे हैं। एक के बिना दूसरे की कल्पना करना बेमानी है। वैदिक काल के ध्येय वाक्य…
राष्ट्रवाद और भारत
सलिल सरोज यूरोप में आधुनिक राष्ट्रवाद का उदय राष्ट्र-राज्यों के गठन से जुड़ा हुआ है। इसका मतलब उनकी पहचान और अपनेपन की भावना तथा लोगों की समझ कि वे कौन थे आए बदलावों को किस तरह परिभाषित करते हैं, सब…
“भारत के प्रथम नहर और बीज विज्ञानी: भगवान हलधर”
नीता चौबीस भारतीय धर्म और संस्कृति में बलराम एक हिंदुओं के देवता और भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में पहचाने जाते है। जगन्नाथ परंपरा, त्रय देवताओं में से एक के रूप में वह विशेष रूप से महत्वपूर्ण…







