मालंच नई सुबह

सच हार नही सकता

सम्पादकीय

“प्राचीन भारतीय राजनय और वृहतर भारत की गौरवगाथा” (भाग ६ )

—-डॉ नीता चौबीसा,’ इसके अलावा दक्षिण पूर्वी एशिया के कम्बोज, चम्पा, मलाया, बर्मा और इण्डोनेशिया में भी विजय और शैलेन्द्र साम्राज्य की स्थापना कर भारतीय संस्कृति की पताका ने विश्व गौरव हासिल किया। चोल शासकों द्वारा लंका पर राजनैतिक प्रभुसत्ता…

सम्पादकीय

“प्राचीन भारतीय राजनय और वृहतर भारत की गौरवगाथा” (भाग ५)

प्राचीन भारतीय राजनय का प्रमुख आधार कौटिल्य का अर्थशास्त्र,मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति जैसे गर्न्थो पर टिकी थी जो आज भी भारतीय राजनीति के आधारस्तंभ माने जाते है।प्रायः सभी भारतीय राजनीतिक विचारकों-कौटिल्य, मनु, अश्वघोष, बृहस्पति, भीष्म, विशाखदत्त आदि ने राजाओ के कर्तव्यों…

सम्पादकीय

“प्राचीन भारतीय राजनय एवं वृहतर भारत की गौरव गाथा” (भाग-4)

डॉ.नीता चौबीसा  बांसवाड़ा राजस्थान भारत में राजनय सिद्धान्त और वैदेशिक सम्बन्धो का प्रयोग अति प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। महाकाव्य तथा पौराणिक गाथाओं में राजनयिक गतिविधियों, राज्यो के पारस्परिक सम्बन्धों के अनेकों द्रष्टान्त मिलते हैं। ऋग्वेद तथा…

प्रचीन भारतीय राजनय एवं वृहत भारत की गौरव गाथा-भाग 3

डॉ नीता चौबीसा प्राचीन काल मे भारतीयराजदर्शन आदर्शवादी न होकर अत्यंत व्यावहारिक रहा है।भारतीय राजदर्शन में आदर्श राज्य या ‘यूटोपिया’ सम्बन्धी काल्पनिक विचारों का सर्वथा अभाव है। जिस प्रकार पाश्चात्य जगत में प्लेटो के ‘रिपब्लिक’ और सर टौमस मूर के…

सम्पादकीय

“प्राचीन भारतीय राजनय एवं वृहतर भारत की गौरव गाथा” (भाग-२)

डॉ नीता चौबीसा (‘बांसवाड़ा, राजस्थान) प्रायः वर्तमान में राजनीतिक चिन्तन को केवल पश्चिम की ही परम्परा एवं थाती माना जाता है परन्तु गौर करें तो भारत की लगभग पाँच हजार वर्षों से भी अधिक प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति में राजनीतिक…

सम्पादकीय

राष्ट्रनिर्माता डा. काशी प्रसाद जायसवाल

 डॉ ध्रुव कुमार 1924 ईस्वी में अपने देश में एक किताब प्रकाशित हुई – ”  हिंदू पालिटी । ” यह किताब भारतीय इतिहास में क्रांति पैदा करने वाली पुस्तक साबित हुई । ऐसा इसलिए कि आमतौर पर अंग्रेज इतिहासकार भारत…

सम्पादकीय

युगपुरुष कथासम्राट निःस्वार्थ साहित्यसेवी,बेहतरीन समाज सुधारक, अत्यनत स्वाभिमानी, निर्विकार व्यक्तित्व,तथा बेखौफ पत्रकार,संतपुरुष मुंशी प्रेमचंद

नमन करता हु उस युगपुरुष कथासम्राट निःस्वार्थ साहित्यसेवी,बेहतरीन समाज सुधारक, अत्यनत स्वाभिमानी, निर्विकार व्यक्तित्व,तथा बेखौफ पत्रकार,संतपुरुष मुंशी प्रेमचंद को। मुंशी प्रेमचंद का मैं बहुत बड़ा प्रशंसक तो अपने स्कूल के दिनों से ही था जब मैं उनकी कहानी नमक का…