घुटता बचपन लीलता जीवन: बालश्रम
डॉ नीता चौबीसा बाँसबाडा,राजस्थान न कोई चिंता, ना कोई फिक्र,खुले आसमान तले धींगा मस्ती ,उछलकूद, खेत खलिहानों और खुले बगीचों वनों में दौड़ते हुए तितली पकड़ना, एक निश्चिंत भरपूर जीवन का आनंद,यही होता है, बचपन।!किंतु कुछ बच्चों के बचपन में…
अफगान संकट और भारत की चुनौतियाँ”
डॉ.नीता चौबीसा, बांसवाड़ा राजस्थान अफगानिस्तान में सियासत की घड़ी एक बार फिर दो दशक पीछे खड़ी नजर आ रही है जब काबुल के किले पर तालिबान का परचम लहरा रहा है जिस तरह से काबुल का किला ढहा, जिस तरह…
“अरे रामा कजरी तीज का मेला …!”
कजरी तीज पर विशेष.. हमारी संस्कृति डॉ.नीता चौबीसा, बांसवाड़ा राजस्थान भारत एक उत्सवधर्मी देश है, जहां उत्सवों का अपना एक अलग रंग देखने को मिलता है। यह उत्सव ही है जो भारत की एकता और अखंडता को कायम रखे हुए…
स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी सेनानियों का योगदान
सलिल सरोज आदिवासी समाज स्वतंत्र संस्कृति का वाहक रहा है इसीलिए उसे किसी का उसके इलाके में जबरन घुसपैठ पसंद नहीं। आदिवासियों का मानना है कि उनके इलाके में कोई भी आये उसका स्वागत है लेकिन वहाँ रहकर अगर उनके…
अंतरजातीय विवाह
सलिल सरोज भारत कठोर जाति और धार्मिक व्यवस्था वाला एक पारंपरिक समाज बना हुआ है। जाति और धर्म लोगों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर विवाह में साथी के चयन में। अधिकांश के लिए, दूसरी जाति में…
“अवधूत शिव की अर्चना” (भाग 4) ‘नटराज राज नमो नमः..!’
डॉ.नीता चौबीसा, बांसवाड़ा राजस्थान नटराज शिव का आविर्भाव के उस स्वरूप की महिमागान है जिसमे ब्रह्मांडीय ऊर्जा का समष्टि एकीकृत रूप समाहित है जो विनाश में भी विकास का बीज अंकुरित करते है जो विंध्वस में भी सृजन की संभावना…
अवधूत शिव की अर्चना” (भाग ३) ‘नटराज राज नमो नमः..!’
डॉ नीता चौबीसा , भगवान शिव को सामान्यतः संहार का देवता माना जाता है किंतु भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों रूपो के लिए विख्यात हैं। शिव आदिदेव अर्थात स्वयंभू या self born है।न उनका आदि है न ही…
अवधूत शिव की अर्चना“ भाग-2 शिव का अघोरी रूप व महिमा-
डॉ नीता चौबीसा त्रिदेवो में एक शिव का रूप और महिमा दोनों ही अनुपमेय है।वेदों में शिव को रुद्र के नाम से सम्बोधित क्रिया गया तथा इनकी स्तुति में कई ऋचाएं लिखी गई हैं । सामवेद और यजुर्वेद में शिव-स्तुतियां…
अवधूत शिव की अर्चना”
‘डॉ नीता चौबीसा यथा ब्रह्माण्डे तथा पिंडे ‘का उदघोष करने वाले उपनिषद भी मानते है कि मनुष्य स्वभावतः पशु है ।इसिलए वैदिक वांग्मय में आह्वान किया गया- “मनुर्भव मनुर्भव!!”दरसल मनुष्य होना एक सम्भावना है,सम्भावना जो नवीन क्रांति का आगाज़…
“प्राचीन भारतीय राजनय और वृहतर भारत की गौरवगाथा” (भाग १०) ‘वृहतर भारत और चम्पा या वियतनाम’-
वियतनाम या आधिकारिक तौर पर वियतनाम समाजवादी गणराज्य, दक्षिणपूर्व एशिया के हिन्दचीन प्रायद्वीप के पूर्वी भाग में स्थित एक देश है। इसके उत्तर में चीन, उत्तर पश्चिम में लाओस, दक्षिण पश्चिम में कंबोडिया और पूर्व में दक्षिण चीन सागर स्थित…
“प्राचीन भारतीय राजनय और वृहतर भारत की गौरवगाथा” (भाग ९)
–—-डॉ नीता चौबीसा वृहतर भारत का हिस्सा कंबुज: दो अन्य प्रमुख भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों चम्पा (अन्नाम) और कम्बोज (कम्बोड़िया) साम्राज्यों पर भारतीय मूल के राजाओं ने शासन किया। भारत और कम्बोडिया के घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंध का इतिहास प्रथम और…
“प्राचीन भारतीय राजनय और वृहतर भारत की गौरवगाथा” (भाग ८)
)-डॉ नीता चौबीसा दक्षिण पूर्व एशियाई देश व वृहतर भारत: स्यामदेश स्यामदेश एक ऐसा देश है जो पूरी तरह भारतीयता के रंग में रंगा आज भी दृष्टव्य होता है।स्याम देस या आधुनिक थाईलैंड में थेरावाद बौद्ध के मानने वाले बहुमत…







