मालंच नई सुबह

सच हार नही सकता

सम्पादकीय

कमाल ख़ान ने मक्का में हज पर जा कर भी कभी नमाज नहीं पढ़ी थी

दयानंद पांडेय ऐसी सौभाग्यशाली मृत्यु भी कितनों को मिलती है भला। कि रात रिपोर्ट पेश की और सुबह विदा हो गए। कमाल ख़ान वाकई बाकमाल थे। एच एल की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता में आए थे। नब्बे के दशक में…

लेकिन मोदी की जगह राहुल गांधी को हरगिज नहीं चुन सकते

दयानंद पांडेय राहुल गांधी , कांग्रेस , भाजपा , नरेंद्र मोदी या किसी भी की ग़लत बात या काम पर ठप्पा हम तो नहीं लगा सकते। लेकिन मोदी की जगह राहुल गांधी को हरगिज नहीं चुन सकते। मोदी ने बहुत…

उज्जैन ही नहीं भारत की शान भारती भवन की शान और शुचिता को बचना बहुत ज़रुरी है

दयानंद पांडेय आप जाइए कभी यूरोप के किसी देश। रुस जाइए। फ़्रांस जाइए। कहीं भी जाइए। लेखकों के घर स्मारक के रुप में मिलेंगे। शेक्सपीयर से लगायत टालस्टाय , गोर्की हर किसी के स्मारक मिलेंगे। लोग वहां फ़ोटो खिचवाते मिलेंगे।…

लक्ष्मीपुर गुरुद्वारा : बिहार का स्वर्ण मंदिर

डॉ ध्रुव कुमार –सिखों के तीन गुरुओं का आशीष प्राप्त है यहां की माटी –    – गुरु तेग बहादुर जी की हस्तलिखित 40 किलो वजनी गुरुग्रंथ साहिब हैं यहां बिहार में पटना सिटी के तख्त श्रीहरमंदिर साहिब के बाद कटिहार…

भटिण्डा/हुसैनीवाला के षड्यंत्रकारियों को एक बात के लिए श्रेय

 –अनिल सिंह, वाराणसी भटिण्डा/ हुसैनीवाला के षड्यन्त्रकारियों को एक बात के लिए तो श्रेय देना ही होगा: उन्होंने वह सोच लिया जो कोई सोच भी नहीं सकता था कि कोई सोच सकता है। जैसे 9/11 के समय अमेरिका की सुरक्षा-एजेन्सियों…

हुसैनीवाला बार्डर के बहाने कांग्रेस ने अपने ताबूत में एक और कील ठोंक ली

दयानंद पांडेय कोई माने न माने पर मेरा स्पष्ट आकलन है कि हुसैनीवाला बार्डर पर जल्दी ही भाजपा एक रैली फिर से आयोजित करेगी और नरेंद्र मोदी उस में ज़रुर जाएंगे। मौसम साफ़ होने दीजिए। हां , इस बार पंजाब…

क्यों और कैसे मनाया जाने लगा पहली जनवरी को नववर्ष

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना :: वर्ष 2021 का अवसान और नया वर्ष 2022 नववर्ष की खुशी   मनाने की तैयारी विश्वभर में चल रही है। खास बात है कि अलग-अलग देशों में अलग अलग तरीकों से नववर्ष का स्वागत किया जाता…

सबके लिए प्रेरणास्रोत है अटलजी 

अश्विनी कुमार चौबे  केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार के राज्यमंत्री हैं भारत की इस वीर,पूण्य व प्रतापी भूमि पर 25 दिसंबर के दिन का ऐतिहासिक महत्व है. इस दिन…

सम्पादकीय

मैं आप सबसे पूछना चाहती हूं क्या गमछा गंवारों का पहनावा है.?

जो स्थान मां के आंचल का है, वही पिता के गमछे का। विवाह के बाद विदा होती बेटी पिता के सीने से लगकर रोती है। पिता अपने गमछे से उसके आंसू पोछता है। यह गमछा एक प्रतीक है। भरोसे का,पिता…

बिपिन रावत के निधन के बाद कौन होगा देश का अगला CDS? ये दो नाम रेस में

डौक्टर केशव कुमार  देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत के निधन के बाद हर तरफ मातम पसरा है. शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. इस बीच नए सीडीएस  के नाम को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है….

भारत में क्रिप्टो करेंसी: मंथन व विधेयक आवश्यक

विभूती चौबीसा,’गार्गी’,फ्री लांस राइटर राजस्थान

सम्पादकीय

लघुकथा —लेखन से पूर्व की तैयारी

डा पुष्पा जमुआर, पटना, जीवन में कोई भी कार्य करना हो,बिना तैयारी किये सफलता सदैव संदिग्ध रहती है ।लघुकथा भी इस स्वभाविक नियम का अपवाद नहीं है ।”किसी भी साहित्य रचना के सृजन हेतु मुख्यतः दो तत्वों का हीं उपयोग…