मालंच नई सुबह

सच हार नही सकता

साहित्य

मेरे भैया रक्षाबंधन पर आना

डॉ मीना कुमारी परिहार

सावन माह का पूर्णिमा है आया भैया
रक्षाबंधन का पावन त्यौहार है आया भैया
रंग- बिरंगी राखी लेकर आई हूं भैया
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आना भैया
मिठाई,अक्षत ,रोली, दीप और राखी से थाल सजाकर राह तक रही प्यारी बहना
माथे पर मंगल तिलक लगाकर
तुम्हारे जीवन में सुख- समृद्धि की कामना करती है यह बहना
बांधकर रेशम की डोरी तुम पर स्नेह और आशीष लुटाएगी बहना
प्यारी बहना को भूल न जाना मेरे प्यारे भैया
मम्मी -पापा का तुम खूब

 

भूल न जाना भैया
सदा तुम भाभी के संग खुश रहो भैया
भाभी का उपहार पाकर मैं इठलाऊं भैया
भैया -भाभी का प्रेम यूं ही बना रहे
यही कामना करती है बहना
जब भी तुम पर आ जाए कोई भारी मुसीबत
मुसीबत से बाहर निकलने का ईश्वर से करती हूं प्रार्थना भैया
ईश्वर की करती हूं आराधना भैया
हे ईश्वर! मेरे भैया पर अपनी कृपा बनाए रखना
हर वर्ष भैया की कलाई पर राखी बांधती रहूं
भैया मेरी हर हाल में रक्षा करता
रक्षाबंधन प्यार का सौगात है लाता
मेरे प्यारे भैया रक्षाबंधन पर तुम जरूर आना
राह तक रही तुम्हारी बहना
अब तो आ जाओ भैया
जल्दी से तुम आओ
रक्षाबंधन पर्व का मुहुर्त
निकल न जाए भैया
मेरा बेशकीमती उपहार आप ही हो भैया
आ जाओ अब तो कितना इन्तजार कराओगे भैया

ख्याल रखना भैया
अपनी छोटी-सी बहना को

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