पटना डेस्क (मालंच नई सुबह )। लघुकथा साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर एवं समीक्षक डॉ ध्रुव कुमार को इंदौर, मध्यप्रदेश में क्षितिज लघुकथा समालोचना सम्मान -2025 से सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति सभागार में रविवार को क्षितिज साहित्य संस्था के तत्वावधान में आयोजित अष्टम अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन -2025 में अध्यक्ष सतीश राठी, वीणा के संपादक राकेश शर्मा एवं वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने डॉ ध्रुव कुमार को लघुकथा आलोचना के क्षेत्र में 2018 से दिए जाने वाले इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया। गौरतलब है कि डॉ ध्रुव की हिंदी लघुकथा का शास्त्रीय अध्ययन और लघुकथा : सृजन एवं समीक्षा सहित अनेक पुस्तकें प्रकाशित हैं।
कार्यक्रम में उज्जैन के सन्तोष सुपेकर को लघुकथा शिखर सम्मान एवं इंदौर के राममूरत राही को लघुकथा समग्र सम्मान एवं सुश्री दीपा मनीष व्यास को लघुकथा नवलेखन सम्मान से भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सतीश राठी एवं दीपक गिरकर के संपादन में प्रकाशित वार्षिक पत्रिका क्षितिज एवं लघुकथा केंद्रित अन्य कई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।
देश भर से आए लघुकथाकारों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार राकेश शर्मा ने कहा कि हमें कालजयी रचनाएं लेखकों के समर्पण से मिली है। 99 वर्षों से प्रकाशित पत्रिका वीणा का लघुकथा से गहरा रिश्ता रहा है। इसके वर्तमान स्वरूप संबंधित इतिहास की वीणा पत्रिका साक्षी रही है। लघुकथा का इतिहास इंदौर से, वीणा के संपादकों से जुड़ता है।
क्षितिज के अध्यक्ष वरिष्ठ लघुकथाकार सतीश राठी ने कहा कि लघुकथा इस युग की मांग है और आज लघुकथाकारों को अधिक से अधिक सार्थक रचनाओं के सृजन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि हमारे युगीन सरोकारों से लघुकथा को जोड़ने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में चर्चित एवं वरिष्ठ लघुकथाकार डॉ बलराम अग्रवाल, डॉ. पुरुषोत्तम दुबे, सूर्यकांत नागर, मालती बसंत, डॉ. योगेंद्र नाथ शुक्ल, डॉ शोभा जैन, कांता रॉय, ज्योति जैन, घनश्याम मैथिल अमृत, अंतरा करवड़े, डॉ अंजना, अदिति सिंह भदौरिया, डॉ चक्रपाणि मिश्र, डॉ. वसुधा गाडगिल, रश्मि चौधरी, आशा मुंशी, रश्मि स्थापक, मनीष दवे, डॉ आरती सिंह एकता, डॉ नीहार गीते, तनूजा चौबे, सुरेश रायकवार सहित देश के विभिन्न शहरों से आए सौ से अधिक लघुकथाकारों ने अपनी सहभागिता की।
आयोजन के चतुर्थ एवं समापन सत्र में दो दर्जन से अधिक लघुकथाकारों ने अपनी -अपनी लघुकथा का पाठ किया।




