जो जस करहि सो तस फल चाखा
रबीन्द्र कुमार रतन ,स्वतंत्र लेखन एक गावँ में धनवीर नामक ब्यक्ति रहता था । वह अपने व्यवसाय से गावँका सेठ बना हुया था ।व्यवसाय दिन दूना रात चौगुना बढता रहा । इधर व्यवसाय में विकास हो रहा था और उधर…
कविता को स्वच्छंद शैली में प्रस्तुत करती है डॉ. आरती कुमारी की कृति ” धड़कन का संगीत !”: सिद्धेश्वर
पटना/डेस्क (मालंच नई सुबह) 31/01/2022! ” समकालीन कवयित्रियों में एक प्रमुख नाम है डॉ आरती कुमारी का, जो लंबे समय से अपने गीत गजलों के माध्यम से पाठकों के हृदय में रची बसी हुई हैं l-“एहसासों से बांध के मुझको…
चने और जूते
ऋचा वर्मा पत्नी ने जब चने का भूंजा और गुड़ दिया तो एक बार फिर सुनील के आगे वही दृश्य जीवंत होकर उसकी आत्मा को छलनी करने लगा जब बाप दाखिल बड़े भाई ने पांच किलो चने खातिर बखेड़ा खड़ा…
साहित्य सम्मेलन के ४१वें महाधिवेशन की तिथि बढ़ाई गई /अब २-३ अप्रैल को आयोजित होगा दो दिवसीय साहित्यिक कुम्भ, सरस्वती पुत्रों का होगा सम्मान,
उपसमितियों के गठन भी शीघ्र, कार्यसमिति में लिए गए निर्णय पटना/प्रतिनिध पटना (मालंच नई सुबह) पटना, २७ जनवरी। आगामी १२-१३ फरवरी को आहूत होने वाला बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का ४१वाँ महाधिवेशन अब २-३ अप्रैल को आयोजित होगा। कोबिड-१९ के…
हम एक दूसरे की कद्र किए बिना सुखी परिवार और सुखी परिवार बिना सुखी समाज नही बना सकते
पूनम आनंद पटना परिवार की नीव पति पत्नी के आधारस्तंभ से ही शुरू होती है। पति पत्नी बनते हैं एक साथ अनेक रिश्तो की शाखा खुद ब खुद निकल आती है। आपसी प्रेम के अद्भुत संगम का तिकोनिया चतुर्भुज रूप…
मकर संक्रांति
बजरंग लाल केजड़ीवाल ‘संतुष्ट तिनसुकिया, असम देखो देखो सूर्य देव अपना पाला बदल र हेदक्षिण से निकल करउ त्तर की ओर बढ़ रहे सूर्य जो थे धनु राशि पर आ रहे वे मकर राशि पर बड़ा अजीब नजारा है ये…
खुले आसमान में खुशियाँ उड़ी
(डाॅ पुष्पा जमुआर, पटना खुले आसमान में खुशियाँ उड़ी जिन्दगी में रंग घुली जब मन के कोने से निकल कर रंगों भरी मेरी पतंग उड़ी । सारे ग़मों को भूला कर अपना-पराया भूल कर मजबूत डोर में बन्ध कर उड़ी…
चित्रगुप्त की पुण्यतिथि पर जीकेसी की साहित्यिक प्रस्तुति
पटना डेस्क(मालंच नई सुबह) पटना, नयी दिल्ली 11 जनवरी ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के सौजन्य से महान संगीतकार चित्रगुप्त श्रीवास्तव की पुण्यतिथि 14 जनवरी के अवसर पर साहित्यिक प्रस्तुति का आयोजन किया जा रहा है। जीकेसी कला-संस्कृति प्रकोष्ठ…
प्रिंट मीडिया का विकल्प, मोबाइल साहित्य कभी नहीं हो सकता !” : सिद्धेश्वर
पटनाडेस्क (मालंच नयी सुबह) :10/01/2021! ” साहित्य का सृजन भले पन्ने पर होता हो, किंतु पाठकों को पढ़ने के लिए प्रिंट मीडिया ही चाहिए ! यानी प्रिंट मीडिया का विकल्प मोबाइल साहित्य कभी नहीं हो सकता l “ भारतीय युवा…
एक हैं आनंदी प्रसाद बादल
डॉ ध्रुव कुमार 89 वर्षीय आनंदी प्रसाद बादल। देश के जाने-माने चित्रकार, जिनके चित्रों में लोक-संस्कृति की गंध है, सामाजिक जीवन के विविध रंग है, जो दर्शकों को सम्मोहित करते हैं और बेचैन भी । उनके चित्रों में ग्राम संस्कृति…









