जिसके शीश गुरु का साया
जिसके शीश गुरु का साय नफे सिंह योगी मालड़ा © महेंद्रगढ़ हरियाणा कैसे उमड़ा जोश बदन में , कैसे इतना साहस पाया ? पता कभी नहीं चले किसी को, जिसके शीश गुरु का साया ।। मुश्किल में मुस्काया कैसे ,…
कुंडली मिलान- वहम या अंधविश्वास?
प्रेमलता सिंह, पटना आधुनिक युग मैं लोग जैसे -जैसे शिक्षित हो रहे हैं , अंधविश्वास कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। ज्यादातर लोग अपने बेटा और बेटी की शादी में कुंडली मिलान करने के लिए पंडित जी…
पुरानी गली
प्रियंका त्रिवेदी/बक्सर-डुमरांव फिर वो पुरानी गली,जब सामने से गुजर गई। बहुत से खट्टे-मीठे लम्हों को,फिर संजो गई।। चिलमन में झांका तो ,फिर वो चेहरे दिखे। वो पल लबों पे हंसी,आंखों में नमी छोड़ गई।। जहां बीता मेरा बचपन,थी मैं जवान…
अम्मा मन में सोच रही है
–● हरिनारायण सिंह ‘हरि’ अम्मा मन में सोच रही है किस बेटे की आस लगाऊँ जिसको सब दिन पाला-पोसा उससे रूखा-रूखा पाऊँ रंग-ढंग बेटों के बदले कटे-कटे-से वे अब रहते बीवी चढ़ी-चढ़ी रहती हैं/ सबकी है बेचारे सबकुछ हैं सहते…
गीत मेरे नाम के लिखना सनम
——राजकान्ता राज गीत मेरे नाम के लिखना सनम शायरी को पुर-अदब पढ़ना सनम मैं लिखूं ग़ज़लें तुम्हारे वस्ल की छेड़ दूं जब तान तुम सुनना सनम मैं बनूंगी ताल – सुर, संगम सभी महफ़िलों की शान तुम बनना सनम ज़िंदगी…
जीवन धन बिटिया
—इन्दु उपाध्याय तुम स्वतंत्र हो बिटिया,सबका जीवन धन यंत्र हो। तुम सौभाग्य के कपाल पर,लिखा का सुख मंत्र हो। सबके लिये शीतल बयार हो,ज़िन्दगी की मधुर ताल हो। मन की बगिया के मधु से सिंचित-सी,प्यारी कविता हो। जीवन के धूप…
अद्भुत और विरल व्यक्तित्व के धनी थे डॉक्टर रमेश नारायण दास
नीरव समदर्शी डॉक्टर रमेश नारायण दास मैथली के साहित्यकार और ए0एन0 कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष थे।उनकी मैथली कथा संग्रह पाथरक नाव और उज्जर सपेत ग्राम्य जीवन पर आधारित है।आज मैं पितृ दिवस के अवसर पर उनके साहित्यिक…
नहीं रहे राष्ट्रभाषा प्रहरी नृपेंद्रनाथ गुप्त / साहित्य समाज में शोक की लहर
पटना/प्रतिनिधि(मालंच नई सुबह)पटना, १२ जून। ‘राष्ट्रभाषा-प्रहरी के रूप में समादृत हिन्दी के वयोवृद्ध साहित्य-सेवी, साहित्यिक त्रैमासिकी ‘भाषा भारती संवाद’ के प्रधान संपादक और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष नृपेंद्रनाथ गुप्त नहीं रहे। रविवार के पूर्वाह्न दस बजे पटना…
प्रकृति और मानव
राज प्रिया रानी बेमौसम बरस रही घटा घोर बरसात उकेर रही हजारों अनसुलझे सवाल मानवता का क्षरण कस रहा है जाल भौगौलिक संरक्षण में बुन गया जंजाल बेकाबू में धरती का प्रदूषण नियंत्रण क्षरण हरण हुआ धरा का…
मुझे टूटना ही होगा…
—–नीरव समदर्शी जानता हूँ मैं कि जो झुकता नहीं है वह टूट जाता है| जानता हूँ मैं जो जितना झुकता है उतना ही उठता है मगर क्या करूं मैं अपनी इस रीढ़ की हड्डी का, जो लोहे सा सख्त है|…











