जलता तन या फिर मन
प्रियांशु त्रिपाठी उलझा रहा बड़ी देर तक इस एक कशमकश में कि जलता तन या फिर मन या दोनों ही जल जाते हैं देर से आने वाले शख़्स जल्दी क्यों चल जाते हैं जन्म वाले छलकते आँसू सबके आँखों…
क्या यही है महिलाशक्तिकरण?
प्रेमलता सिंह, पटना, बिहार औरत अगर ठान लेती तो कब का पितृसत्ता समाप्त हो गया रहता।औरतें आजतक अपने अंदर की शक्ति को पहचानी ही नहीं । औरतों में जलन की भावना कुछ ज्यादा ही होती हैं। भाभी, ननद, जेठानी, देवरानी,…
मानव मूल्यों की महत्ता
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहितकवि,साहित्यकार जिला झालावाडराजस्थान मानव सृष्टि का सबसे खूबसूरत विकसित मस्तिष्क वाला जीव ईश्वर की अनमोल कृति है। जो सोचता है बोलता है गति करता है नित नये विकास की ओर बढ़ता हैं। वह परिश्रम कर सफलता…
बाल कवयित्री शुभांगी शर्मा ने किया दोहा विशेषांक का विमोचन
पटना डेस्क (मालंच नई सुबह ) भवानीमंडी:- अखिल भारतीय साहित्य परिषद भवानीमंडी द्वारा प्रकाशित साहित्य दर्शन ई पत्रिका का ऑनलाइन विमोचन समारोह गुरुवार को आयोजित किया गया जिसमें साहित्य दर्शन ई पत्रिका वर्ष 02,अंक 26 दोहा विशेषांक का ऑनलाइन विमोचन…
” भाषा यदि गुलाम रही तो देश की आजादी के बाद भी, पराधीनता का अनुभव करते रहेंगे हम !”
पटना पटना,/प्रतिनिधि(मालंच नई सुबह ) 01/09/2021! ” हमारे अमर साहित्यकारों ने ठीक ही कहा है कि ” देश और भाषा की आजादी में सर्वाधिक प्राथमिकता भाषा को मिलनी चाहिए ! क्योंकि भाषा यदि गुलाम रही तो देश की आजादी के…
डा दीन के काव्य में ही नहीं प्राण में भी कबीर थे,डा उषा रानी जी वैदुष्य और वात्सल्य की संज्ञा ही थी /साहित्य सम्मेलन में दोनों साहित्यिक-युगल को श्रद्धापूर्वक किया गया स्मरण,
पटना,/प्रतिनिधि(मालंच नई सुबह ) १ सितम्बर। स्तुत्य कवि और शिक्षाविद प्रो सीताराम ‘दीन’ हिन्दी के एक ऐसे महान कवि हुए, जिनके काव्य में ही नही, प्राण में भी कबीर बसते थे। उन्होंने अपने साहित्य और जीवन में भी कबीर को…
कान्हा मेरे कान्हा
कान्हा मेरे कान्हा जी अनुभव राज,मुज़फ़्फ़रपुर सभी के प्यारे कान्हा जी यशोदा माँ के लाडले नंद दुलारे कान्हा जी गोपी संग प्रेम में रास रचाये कान्हा जी नाग कालिया के फन प रनृत्य दिखाये कान्हा जी द्रौपदी की लाज रखी…
पान बनारसिया
प्रियांशु त्रिपाठी बनारस आये और बनारसी पान ना खाये तो क्या ही बनारस आने का फायदा । इसी सोच से हम पाँच केरला कैफे के बाद पान की तलाश में और सब इतने थके कि कहते हैं हरिओम तुम चले…
पाठकों के अंदर ऊर्जा का संचार करने में सफल साहित्यक प्लेटफार्म
कुमार संदीप (मुजफ्फरपुर-बिहार) गूगल सर्च इंजन पर अपनी ज़रूरत की जानकारियां सर्च कर हम हर दिन ख़ुद के अंदर ज्ञान में वृद्धि करते हैं, जानकारियां हासिल कर मुश्किलें हल करते हैं। और यह अकाट्य सत्य भी है कि जीवन में…











