मालंच नई सुबह

सच हार नही सकता

सम्पादकीय

सत्ताधीश जे पी के अनुयाई और जेपी विचारधारा के विपरीत सत्ता की धारा…

———नीरव समदर्शी

बीसवीं सदी के आखिरी दशक से आज 2021 तक लगभग उन सभी क्षेत्रों में जहां जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति सफल रही थी आज जयप्रकाश नारायण के अनुयायियों की सत्ता है। यह बीसवीं सदी के आखिरी दशक के प्रारंभिक काल से जेपी के मुख्य अनुयाई लालू प्रसाद यादव के बिहार के मुख्यमंत्री बनने से आरंभ हुआ फिर उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश गुजरात राजस्थान हरियाणा इत्यादि लगभग संपूर्ण हिंदी पट्टी में जेपी के अनुयाई सत्ता पर काबिज रहे या अत्यधिक शक्तिशाली बने रहे। वर्तमान स्थिति में भारत के अधिकतर राज्यों में या तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार है

या भारतीय जनता पार्टी अपने किसी सहयोगी के साथ मिलकर या किसी को सहयोग देकर सरकार में बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना अटल बिहारी वाजपेई और लालकृष्ण आडवाणी तथा पुराने जनसंघ के  कुछ अन्य उनके समकक्ष नेताओं ने मिलकर किया था ।आज की भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल समाजवादी पार्टी ,बहुजन समाज पार्टी ,लोक जनशक्ति पार्टी ,इत्यादि के लगभग सभी अग्रगण्य नेता जेपी आंदोलन के ही पैदाइश है। जयप्रकाश नारायण अत्यंत इमानदार अत्यधिक समर्पित और मजबूत प्रतिकारकर्ता अत्यंत धैर्यशील व्यक्ति थे ।72 वर्ष के बुढ़ापे की वैसे कमजोर शरीर जिसे तत्कालीन सरकार द्वारा जेल में गलत मेडिसिन के माध्यम से दोनों किडनी को खराब कर डायलिसिस पर जाने तक की स्थिति पैदा कर दी गई हो अपने उस कमजोर शरीर के बूते सिर्फ अपनी मानशिक शक्ति के बदौलत वैसी तनाशाही  सरकार को जिसने देश में इमरजेंसी लगा रखा थी उसके विरुद्ध युवाओं को संगठित कर आंदोलन छेड़ दिया था। जयप्रकाश नारायण के उसी आंदोलन को संपूर्ण क्रांति कहा गया। जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति ने संपूर्ण देश में तत्कालीन युवाओं की बहुत बड़ी जनसंख्या को भारतीय राजनीति में  सक्रिय किया भारत में इमरजेंसी काल काआंदोलन जो 1973- 74 में इमरजेंसी काल में संपूर्ण भारत में चलता रहा। उस आंदोलन ने तत्कालीन इंदिरा गांधी की सरकार को उखाड़ फेंका ।उनके स्थान पर सभी विपक्षी पार्टियों का एकीकृत नवनिर्मित जनता पार्टी की सरकार स्थापित किया। किंतु बहुत छोटे से कालखंड मे बेमेल राजनीतिक दलों का कुनबा कई टुकड़ों में विघटित होकर सत्ता से काफी दूर चली गई और कांग्रेस पार्टी पहले से अधिक शक्ति के साथ केंद्रीय सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले लिया। संपूर्ण क्रांति के पैदाइश वह बिखरा जेपी अनुयायीजेपी की विचारधारा को अपनी विचारधारा बता राजनीति के दंगल में जोर आजमाइश करने लगे ।धीरे धीरे वहां से भारतीय राष्ट्रीय सत्ता और राज्य सत्ता दोनों पर ही जगहों पर जे पी के अनुयायियों का का वर्चस्व बन गया।ये सरकारें किस विचारधारा पर चल रही है ?क्या स्थापित कर रही है? किस दिशा में जा रही है ?इस विषय पर अगर ईमानदारी से विचार किया जाए तो स्थिति अत्यधिक पीड़ा दायक है। जयप्रकाश नारायण महान मानवतावादी नेता थे मानवता के लिए जयप्रकाश नारायण ने अपने दांपत्य जीवन में रहते ब्रम्हचर्य व्रत ले लिया। मानवता की रक्षण के लिए उन्होंने अपने आप को राजनीतिक पदों से दूर कर लिया और विभिन्न ने गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से देश के असहाय मजबूर  लोगों की जिंदगी में रोशनी भरने का कार्य प्रारंभ कर दिया था ।वह  समाजवादको आत्मसात कर चुके थे। उनकी कार्यशैली भी समाज के उत्थान पर आधारित था।उनके अनुयायियों के कार्य शैली और व्यवहार उसके ठीक विपरीत है वर्तमान में। आरक्षण के माध्यम से जातिवाद को बढ़ावा देना जाति आधारित बातें करना अपने विरुद्ध बोलने वाले को धनबल के सहारे चुप करना बाजार वाली संस्कृति को बढ़ावा देना विदेशी निवेश को बढ़ावा देना इन सब कार्यों को के लिए बिचौलिए का उपयोग करना यानी दलाली संस्कृति को बढ़ावा देना आज बदस्तूर जारी है।आज जेपी के अनुयायियों की यह विचारधारा यानी सत्ता की विचारधारा जेपी के विचारधारा के बिल्कुल विपरीत दिशा में द्रुत गति से चल रही है।

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